वेतन निर्धारण में लेट लतीफी और भेदभाव से नाराज शिक्षक पिछले 20 घंटों से अनशन पर।
1. -जिलाधिकारी से पूरे मामले को संज्ञान में लेने का शिक्षकों ने किया अनुरोध
2. -विभाग की लापरवाही से नाराज होकर अनिश्चित कालीन अनशन की शुरुआत. समाहरणालय के सामने बैठें हैं अनिश्चिकालीन अनशन पर.
3. -पिछले 13 साल से अप्रशिक्षित का दंश झेल रहे हैं ये शिक्षक.
4. -ग्रेड पे के लाभ से वंचित हैं ये शिक्षक
वेतन निर्धारण में भेदभाव और आर्थिक तंगी से जूझ रहे जिले के नव प्रशिक्षित नियोजित शिक्षकों ने अनिश्चित कालीन अनशन की शरुआत कर दी है.शुक्रवार दोपहर 2 बजे से नियोजित शिक्षक अनशन पर बैठे हैं बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रागिबुर्र रहमान ने कहा कि आधा दर्जन जिलों में जब नियम के तहत वेतन निर्धारण हुआ है तो किशनगंज शिक्षा विभाग यहां दूसरा नियम कैसे लागू कर सकता है.जिले के नव प्रशिक्षित शिक्षकों के साथ इस तरह का भेदभावपूर्ण रवैया नहीं चलेगा.संघ के जिलाध्यक्ष रागिबुर्र रहमान ने शिक्षा विभाग के उदासीन रवैया पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि विभागीय भेदभाव और लेट-लतीफी से आहत होकर शिक्षक अनशन करने को मजबूर है.
राष्ट्र की मुख्यधारा शिक्षा प्रदान करने की जिम्मेवारी का निर्वाहन जिले के सभी नियोजित शिक्षक निष्ठा एवं ईमानदारी पूर्वक करते आ रहे हैं वावजूद इसके जिला शिक्षा विभाग के उदासीन रवैया से नियोजित शिक्षक त्रस्त हैं. एक तरफ सरकार अप्रशिक्षित शिक्षकों को सेवा के 8 वर्ष के बाद प्रशिक्षण कराती है उसके उपरांत फिर तीन वर्ष बाद परीक्षाफल प्रकाशन करती है. परीक्षाफल प्रकाशन के दस माह बाद भी नियोजित शिक्षकों को प्रशिक्षित वेतन से विभाग वंचित रख कर प्रताड़ित करती है, और अब इंडेक्स की सोची समझी साजिश रच कर शिक्षकों को मानसिक रूप से तंग किया जा रहा है. जो सरकार तथा विभाग की सोची-समझी रणनीति है.ध्यातब्य हो कि 04-10-2019 शिक्षा विभाग पटना के द्वारा नियोजित शिक्षकों के वेतन निर्धारण हेतु पत्र निर्गत होता है. जिसे समझने में जिला शिक्षा विभाग दो माह लगा देतें हैं. संघ के बार-बार अनुरोध पर जिला शिक्षा विभाग 16 जनवरी 2020 को समस्थानिक इंडेक्स में वेतन निर्धारण हेतु पत्र निर्गत करता है उसी आधार पर कई प्रखंडों में वेतन निर्धारण की प्रक्रिया प्रारंभ होती है.फिर 20 दिन बाद जिला शिक्षा विभाग द्वारा अचानक शिक्षा विभाग पटना से मार्गदर्शन मांगना यह स्पष्ट करता है कि जिला शिक्षा विभाग नियोजित शिक्षकों का वेतन निर्धारण करना नहीं चाहती है.केवल टालमटोल कर समय नष्ट कर रही है.लिहाजा सेवा के 13 साल के बाद भी इन शिक्षकों को प्रशिक्षित वेतनमान से वंचित कर इन्हें मानसिक एवं आर्थिक रूप से परेशान किया जा रहा है.इन शिक्षकों को हर माल 8 से 9 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.आखिर शिक्षा विभाग पटना के निर्देश का अनुपालन जिला शिक्षा विभाग क्यों नहीं कर रहा है?
अनशन करना शिक्षकों की विवशता
2007 में सेवा में आने वाले शिक्षक 2013-2015 बैच में ट्रेंड हुए लेकिन फाइनल रिजल्ट का प्रकाशन मार्च 2019 में हुआ और अंक पत्र का वितरण नवंबर 2019 में,शिक्षा विभाग की घोर लेट-लतीफी के कारण 02 साल का कोर्स सात साल में पूरा तो हुआ अब विभाग वेतन निर्धारण में रोड़े अटका रही है.जिससे नाराज होकर शिक्षक अनिश्चित कालीन अनशन पर बैठने को विवश है.
स्कूल छोड़ क्यों? अनशन को विवश हुए शिक्षक..!!
बेतिया,चंपारण सहित आधा दर्जन जिलों में जिस तरह से वेतन निर्धारण किया गया है उसी आधार पर जिले में वेतन का निर्धारण हो,शिक्षकों ने जिलाधिकारी को पूरे मामले हस्तक्षेप की बात कही है ताकि शिक्षकों की हकमारी ना हो सके.एक स्वर में शिक्षकों ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न्न जिलों में शिक्षा विभाग का नियम अलग-अलग है.आखिर क्यों?जब तक पूरी मांग और वेतन निर्धारण नहीं होता है शिक्षक अनशन पर बने रहेंगे और इसकी पूरी जिम्मेवारी जिला शिक्षा विभाग की होगी।
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